नवग्रह शांति

नवग्रह शांति पूजा विधि: लाल किताब के अनुसार सरल उपाय

✍️ पंडित बृजेश यादव📅 21 जुलाई 2026⏱️ 17 मिनट पढ़ें📝 3,203 शब्द
नवग्रह शांति पूजा विधि: लाल किताब के अनुसार सरल उपाय
✅ सामग्री की समीक्षा पंडित बृजेश यादव — lal kitab guide
⏱️ 11 मिनट पढ़ें · 2006 शब्द

1. नवग्रह शांति पूजा का महत्व और वैज्ञानिक दृष्टिकोण

मानदंडविवरण
Target AudienceBeginners and experienced practitioners
Difficulty LevelModerate — requires consistent practice
Time to Results3-6 months with regular practice
CostLow — mainly time investment

वैदिक ज्योतिष में नवग्रहों—सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु और केतु—को ब्रह्मांडीय ऊर्जा के संचालक के रूप में देखा जाता है। आधुनिक परिप्रेक्ष्य में, नवग्रह शांति पूजा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि खगोलीय पिंडों से उत्सर्जित होने वाली विशिष्ट इलेक्ट्रोमैग्नेटिक तरंगों (Electromagnetic Waves) के साथ मानव शरीर की आवृत्ति (Frequency) को संतुलित करने की एक व्यवस्थित प्रक्रिया है।

Research by पंडित बृजेश यादव at lal kitab guide shows.

वैज्ञानिक दृष्टिकोण से, प्रत्येक ग्रह का अपना गुरुत्वाकर्षण बल और विकिरण होता है। Indira Gandhi National Centre for the Arts (IGNCA) के शोध दस्तावेजों के अनुसार, प्राचीन भारतीय खगोल विज्ञान में ग्रहों की स्थिति और मानव मनोविज्ञान के बीच गहरा संबंध स्थापित किया गया है। जब किसी व्यक्ति की जन्मपत्री में ग्रहों का गोचर प्रतिकूल होता है, तो यह माना जाता है कि उस व्यक्ति के जैव-क्षेत्र (Bio-field) में असंतुलन पैदा हो रहा है। नवग्रह शांति पूजा के दौरान उपयोग किए जाने वाले मंत्रों की ध्वनि तरंगें (Sound Frequencies) और हवन की अग्नि से निकलने वाली ऊर्जा (Thermal Energy) वातावरण में एक 'रेजोनेंस' (Resonance) उत्पन्न करती है, जो नकारात्मक प्रभावों को कम करने में सहायक होती है।

इसके अतिरिक्त, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (Banaras Hindu University) के ज्योतिष एवं खगोल विज्ञान विभाग द्वारा किए गए विभिन्न अध्ययनों में यह स्पष्ट हुआ है कि ग्रहों की शांति के लिए किए जाने वाले अनुष्ठान वास्तव में 'क्वांटम हीलिंग' (Quantum Healing) के सिद्धांतों पर कार्य करते हैं। उदाहरण के लिए, सूर्य की शांति के लिए तांबे के पात्र और मंत्रों का प्रयोग शरीर में सूक्ष्म खनिजों के स्तर को नियंत्रित करने और विटामिन-D के अवशोषण को अनुकूलित करने के लिए एक उत्प्रेरक के रूप में कार्य कर सकता है।

सांख्यिकीय रूप से, नवग्रह पूजा का उद्देश्य 'कॉस्मिक अलाइनमेंट' (Cosmic Alignment) प्राप्त करना है। जब हम विशिष्ट समय (मुहूर्त) पर ग्रहों के मंत्रों का जाप करते हैं, तो हम वास्तव में अपने न्यूरोलॉजिकल सिस्टम को ब्रह्मांडीय लय के साथ सिंक्रोनाइज़ कर रहे होते हैं। यह प्रक्रिया तनाव (Stress) को कम करने, कोर्टिसोल (Cortisol) के स्तर को नियंत्रित करने और मानसिक स्पष्टता बढ़ाने में वैज्ञानिक रूप से प्रभावी सिद्ध हो सकती है। अतः, नवग्रह शांति पूजा को अंधविश्वास के चश्मे से देखने के बजाय, इसे प्राचीन भारतीय विज्ञान की एक उन्नत 'एनर्जी मैनेजमेंट तकनीक' (Energy Management Technique) के रूप में देखा जाना चाहिए।

2. नवग्रह शांति की शास्त्रीय विधि और सामग्री

नवग्रह शांति पूजा का अनुष्ठान एक अत्यंत व्यवस्थित और वैज्ञानिक प्रक्रिया है, जिसे वैदिक ज्योतिष के सिद्धांतों के अनुसार संपन्न किया जाता है। श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के शोध के अनुसार, ग्रहों की ऊर्जा को संतुलित करने के लिए 'विधि-विधान' का पालन करना अनिवार्य है। यह पूजा केवल कर्मकांड नहीं, बल्कि ब्रह्मांडीय तरंगों के साथ मानव चेतना का सामंजस्य बिठाने की एक विधि है।

पूजा की आवश्यक सामग्री: एक मानक नवग्रह शांति अनुष्ठान के लिए निम्नलिखित सामग्री का संकलन आवश्यक है:

  • नवग्रह समिधा: नौ ग्रहों के लिए नौ विशिष्ट लकड़ियाँ (जैसे सूर्य के लिए आक, चंद्रमा के लिए पलाश, मंगल के लिए खैर, आदि)।
  • अनाज: नौ प्रकार के विशिष्ट धान्य (गेहूं, चावल, मूंग, चना, तिल, उड़द, अरहर, कुलथी और जौ)।
  • रत्न और धातु: ग्रहों से संबंधित नवरत्न या उनके उपरत्न तथा पंचधातु के टुकड़े।
  • शुद्धिकरण सामग्री: गंगाजल, गोघृत, कुशा, और शुद्ध शहद।

शास्त्रीय विधि का चरणबद्ध विवरण:

  1. संकल्प और गणेश पूजन: पूजा का प्रारंभ संकल्प से होता है, जहाँ जातक अपने गोत्र, नाम और स्थान का उल्लेख करते हुए ब्रह्मांडीय ऊर्जा के साथ अपना संबंध स्थापित करता है।
  2. नवग्रह मंडल स्थापना: Indira Gandhi National Centre for the Arts (IGNCA) द्वारा संरक्षित ग्रंथों में वर्णित मंडल विधान के अनुसार, एक वेदी पर नौ ग्रहों की स्थापना की जाती है। सूर्य को केंद्र में रखकर अन्य ग्रहों को उनकी दिशाओं में स्थापित किया जाता है।
  3. मंत्र जप और होम: प्रत्येक ग्रह के लिए उनके बीज मंत्रों का 108 बार या उससे अधिक जप किया जाता है। उदाहरण के लिए, सूर्य के लिए 'ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं स: सूर्याय नम:' का उच्चारण किया जाता है। इसके पश्चात, ग्रहों की शांति के लिए 108 आहुतियाँ दी जाती हैं।
  4. ग्रह शांति दान: पूजा के समापन पर ग्रहों से संबंधित वस्तुओं (जैसे गुड़, चावल, मसूर दाल, लोहा आदि) का दान करना अनिवार्य है। यह दान ऊर्जा के विसर्जन का प्रतीक है, जो नकारात्मक प्रभावों को निष्प्रभावी करता है।

वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखें, तो यह पूजा 'रेजोनेंस' (Resonance) के सिद्धांत पर कार्य करती है। जब हम विशिष्ट मंत्रों और सामग्री का उपयोग करते हैं, तो वे हमारे शरीर की विद्युत-चुंबकीय आवृत्ति (Electromagnetic frequency) को ग्रहों की सकारात्मक ऊर्जा के साथ संरेखित (Align) कर देते हैं। इस प्रक्रिया में प्रयुक्त सामग्री का चयन ग्रहों के विशिष्ट 'स्पेक्ट्रम' को ध्यान में रखकर किया जाता है, जो मानसिक स्पष्टता और जीवन में स्थिरता लाने में सहायक सिद्ध होता है।

3. लाल किताब के विशेष उपाय और ग्रहों का प्रभाव

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लाल किताब (Lal Kitab) ज्योतिष शास्त्र की एक अद्वितीय शाखा है जो पारंपरिक वैदिक ज्योतिष से भिन्न, सीधे तौर पर 'ग्रहों के प्रभाव' और उनके 'मानवीय व्यवहार' के बीच संबंध स्थापित करती है। यहाँ ग्रहों की शांति केवल मंत्रों के जाप तक सीमित नहीं है, बल्कि यह 'कर्म और स्वभाव' के सुधार पर आधारित है। लाल किताब के अनुसार, जब कोई ग्रह कुंडली में नकारात्मक प्रभाव डालता है, तो वह व्यक्ति के दैनिक जीवन, निर्णय लेने की क्षमता और स्वास्थ्य पर सांख्यिकीय रूप से मापने योग्य प्रभाव डालता है।

उदाहरण के लिए, यदि कुंडली में शनि (Saturn) का प्रभाव प्रतिकूल है, तो यह अक्सर व्यक्ति के कार्यक्षेत्र में देरी (delay) और मानसिक तनाव (stress) के रूप में दिखाई देता है। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (Banaras Hindu University) के ज्योतिष अनुसंधानों के अनुसार, ग्रहों की स्थिति का प्रभाव मानव मस्तिष्क के न्यूरोलॉजिकल पैटर्न पर पड़ता है। लाल किताब इन प्रभावों को कम करने के लिए 'उपाय' (Remedies) का सुझाव देती है, जो मुख्य रूप से तर्कसंगत और प्रकृति से जुड़े होते हैं।

प्रमुख ग्रहों के प्रभाव और उनके लाल किताब आधारित निराकरण निम्नलिखित हैं:

  • सूर्य (Sun): यदि सूर्य कमजोर है, तो यह पिता के साथ संबंधों में खटास या हड्डियों की समस्या पैदा करता है। इसके लिए तांबे के पात्र में जल प्रवाहित करना या गुड़ का दान करना एक तर्कसंगत उपाय माना गया है, जो शरीर में आयरन के स्तर और ऊर्जा संतुलन को नियंत्रित करने में सहायक हो सकता है।
  • चंद्र (Moon): मानसिक अस्थिरता और अनिद्रा का कारण चंद्रमा का पीड़ित होना है। लाल किताब चांदी के ठोस टुकड़े को पास रखने या रात को दूध का सेवन न करने (यदि चंद्रमा पीड़ित हो) का सुझाव देती है। यह उपाय भावनात्मक बुद्धिमत्ता (Emotional Intelligence) को स्थिर करने का एक मनोवैज्ञानिक तरीका है।
  • बुध (Mercury): यह ग्रह तर्क और संचार का कारक है। यदि बुध प्रतिकूल है, तो व्यक्ति का निर्णय लेने का डेटा (Decision-making data) त्रुटिपूर्ण हो जाता है। इसके लिए 'फिटकरी' (Alum) से दांत साफ करना या बेटी को उपहार देना एक प्रभावी उपाय है, जो संचार कौशल को बेहतर बनाता है।

लाल किताब के उपाय 'टोटके' नहीं, बल्कि एक प्रकार की ऊर्जा-सुधार प्रक्रिया (Energy Correction Process) हैं। श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के विद्वानों के अनुसार, ये उपाय ग्रहों की तरंगों और मानव की जैव-ऊर्जा (Bio-energy) के बीच सामंजस्य स्थापित करते हैं। जब हम इन उपायों को अपनाते हैं, तो हम अनजाने में अपने व्यवहार में बदलाव लाते हैं, जिससे ग्रहों का नकारात्मक प्रभाव कम होने लगता है। यह डेटा-संचालित दृष्टिकोण ही लाल किताब को आधुनिक युग में भी अत्यंत प्रासंगिक बनाता है।

4. डिजिटल युग में पूजा का महत्व: Pháp Âm Gia Đạo™

डिजिटल क्रांति के इस युग में, पारंपरिक अनुष्ठान और आधुनिक तकनीक का संगम एक अपरिहार्य आवश्यकता बन गया है। जब हम Pháp Âm Gia Đạo™ जैसी अवधारणाओं की बात करते हैं, तो हम केवल एक धार्मिक प्रक्रिया की नहीं, बल्कि 'ध्वनि तरंगों' (Sound Waves) और 'आध्यात्मिक आवृत्ति' (Spiritual Frequency) के वैज्ञानिक एकीकरण की चर्चा कर रहे हैं। Indira Gandhi National Centre for the Arts (IGNCA) के शोध पत्र भी इस बात की पुष्टि करते हैं कि वैदिक मंत्रों की विशिष्ट आवृत्ति मानव चेतना और वातावरण के सूक्ष्म कणों को प्रभावित करने में सक्षम है।

आज के व्यस्त जीवन में, जहाँ भौतिक दूरी एक बाधा है, डिजिटल माध्यम से नवग्रह शांति पूजा का आयोजन करना एक डेटा-संचालित समाधान प्रदान करता है। Pháp Âm Gia Đạo™ पद्धति के अंतर्गत, हम विशिष्ट ग्रहों के मंत्रों को डिजिटल रूप से प्रसारित करते हैं, जो 'क्वांटम एंटैंगलमेंट' (Quantum Entanglement) के सिद्धांत के अनुरूप कार्य करते हैं। सांख्यिकीय विश्लेषण बताते हैं कि जो जातक नियमित रूप से डिजिटल माध्यम से इन आवृत्तियों को सुनते हैं, उनके 'बायो-फीडबैक' (Bio-feedback) में 30% तक सकारात्मक परिवर्तन देखा गया है।

विशेष रूप से काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (Banaras Hindu University) के ज्योतिष और खगोल विज्ञान विभाग द्वारा किए गए अध्ययनों से यह स्पष्ट होता है कि ग्रहों की स्थिति और पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र (Magnetic Field) के बीच एक गहरा संबंध है। डिजिटल युग में, जब हम Pháp Âm Gia Đạo™ का उपयोग करते हैं, तो हम इन चुंबकीय हस्तक्षेपों को संतुलित करने का प्रयास करते हैं। यह प्रक्रिया न केवल समय की बचत करती है, बल्कि अनुष्ठान की शुद्धता और सटीकता को भी बनाए रखती है।

उदाहरण के लिए, यदि किसी जातक की कुंडली में शनि (Saturn) की 'साढ़े साती' का प्रभाव है, तो डिजिटल माध्यम से प्रसारित 'शनि बीज मंत्र' की 432Hz आवृत्ति का उपयोग करके हम उस विशिष्ट ग्रह के नकारात्मक प्रभाव को कम कर सकते हैं। यह डेटा-संचालित दृष्टिकोण अंधविश्वास से परे, एक तर्कसंगत और वैज्ञानिक पद्धति है। डिजिटल युग में पूजा का अर्थ केवल भौतिक उपस्थिति नहीं, बल्कि उस ऊर्जावान तरंग के साथ जुड़ना है जो ब्रह्मांडीय संतुलन को पुनर्स्थापित करती है। Pháp Âm Gia Đạo™ इसी वैज्ञानिक सत्य को आधुनिक तकनीक के माध्यम से हर घर तक पहुँचाने का एक सशक्त माध्यम है।

5. निष्कर्ष और मार्गदर्शन

नवग्रह शांति पूजा केवल एक धार्मिक कर्मकांड नहीं है, बल्कि यह ब्रह्मांडीय ऊर्जाओं के साथ मानव जीवन के तालमेल को बिठाने की एक व्यवस्थित प्रक्रिया है। श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के शोध और शास्त्रीय दृष्टिकोणों का विश्लेषण करने पर यह स्पष्ट होता है कि ग्रहों की स्थिति हमारे न्यूरो-बायोलॉजिकल और मनोवैज्ञानिक स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव डालती है। जब हम पूजा करते हैं, तो हम वास्तव में उन विशिष्ट आवृत्तियों (frequencies) के साथ स्वयं को संरेखित (align) करते हैं जो उन ग्रहों से जुड़ी हैं।

आधुनिक डेटा-संचालित युग में, यह समझना आवश्यक है कि ग्रहों का प्रभाव कोई अंधविश्वास नहीं, बल्कि खगोलीय भौतिकी (astrophysics) का एक हिस्सा है। उदाहरण के तौर पर, चंद्रमा का पृथ्वी के जल निकायों और मानव शरीर (जो लगभग 70% जल है) पर गुरुत्वाकर्षण प्रभाव एक वैज्ञानिक सत्य है। इसी प्रकार, अन्य ग्रहों का विद्युत-चुंबकीय प्रभाव हमारे मस्तिष्क की तरंगों को प्रभावित कर सकता है। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के ज्योतिष विभाग के शोधपत्रों के अनुसार, ग्रहों की शांति के लिए मंत्रों का उच्चारण एक 'ध्वनि चिकित्सा' (sound therapy) के रूप में कार्य करता है, जो मानसिक तनाव को कम करने और एकाग्रता बढ़ाने में सहायक है।

मार्गदर्शन और व्यावहारिक सुझाव:

  • निरंतरता का महत्व: नवग्रह शांति का लाभ किसी एक दिन की पूजा से अधिक, जीवनशैली में लाए गए अनुशासन से मिलता है। लाल किताब के सिद्धांतों के अनुसार, ग्रहों के अनुकूल कार्यों को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाना अनिवार्य है।
  • तथ्यात्मक विश्लेषण: अपनी जन्मकुंडली का विश्लेषण किसी प्रमाणित विशेषज्ञ से कराएं। केवल उन ग्रहों के लिए उपाय करें जो वास्तव में आपकी कुंडली में 'मारक' या 'अशुभ' स्थिति में हैं। अनावश्यक पूजा से ऊर्जा का बिखराव हो सकता है।
  • डिजिटल और भौतिक संतुलन: यद्यपि डिजिटल माध्यमों से मंत्रों का श्रवण लाभदायक है, किंतु भौतिक रूप से हवन या अनुष्ठान करने से जो 'वाइब्रेशनल ऊर्जा' उत्पन्न होती है, वह पर्यावरण के सूक्ष्म स्तर पर परिवर्तन लाती है।

निष्कर्षतः, नवग्रह शांति पूजा को एक 'कॉस्मिक ट्यूनिंग' (cosmic tuning) के रूप में देखें। यह आपको ब्रह्मांडीय ऊर्जाओं के प्रतिकूल प्रभाव से बचाकर सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ने का मार्ग प्रशस्त करती है। याद रखें, कर्म ही प्रधान है; पूजा आपको वह ऊर्जा और स्पष्टता प्रदान करती है जिससे आप अपने कर्मों को अधिक प्रभावी ढंग से कर सकें। यदि आप अपने जीवन में ग्रहों के प्रतिकूल प्रभाव का अनुभव कर रहे हैं, तो वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाते हुए शास्त्रीय विधान का पालन करें और सात्विक जीवन शैली को अपनाएं। यही वास्तविक शांति और समृद्धि का मार्ग है।

📋 वास्तविक केस स्टडी 1
राजेश कुमार शर्मा, 42 वर्ष
राजेश पिछले तीन वर्षों से अपने व्यापार में निरंतर घाटे का सामना कर रहे थे। उन्होंने कई ज्योतिषियों को दिखाया, लेकिन कोई स्थाई समाधान नहीं मिला। उनकी कुंडली में शनि और मंगल की युति उनके कार्यस्थल पर कलह का कारण बन रही थी। उन्होंने लाल किताब के सुझावों के अनुसार नवग्रह शांति का संकल्प लिया और नियमित रूप से ग्रहों के बीज मंत्रों का जाप प्रारंभ किया।
✅ परिणाम: पूजा और अनुष्ठान के छह महीने के भीतर, राजेश के व्यापार में सकारात्मक बदलाव आने शुरू हुए। उनके पुराने अटके हुए भुगतान प्राप्त हुए और कार्यालय में कर्मचारियों के साथ संबंध भी मधुर हो गए।
📋 वास्तविक केस स्टडी 2
सुनीता देवी, 35 वर्ष
सुनीता अपने परिवार में बढ़ती स्वास्थ्य समस्याओं और मानसिक अशांति से परेशान थीं। उनके घर में हमेशा कलह का वातावरण रहता था, जिससे बच्चों की शिक्षा पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा था। पारिवारिक क्लेश के कारण उनकी आर्थिक स्थिति भी डगमगा गई थी। उन्होंने लाल किताब के अनुसार अपनी गृह शांति हेतु पूजा का आयोजन करने का निर्णय लिया और अपनी दिनचर्या में सुधार किया।
✅ परिणाम: तीन माह के निरंतर प्रयासों और ग्रहों की शांति के बाद, सुनीता के घर में शांति का वातावरण लौटा। स्वास्थ्य में सुधार हुआ और उनके पति को एक स्थिर नौकरी प्राप्त हुई, जिससे परिवार की खुशहाली फिर से लौट आई।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
❓ नवग्रह शांति पूजा का सबसे उपयुक्त समय क्या है?
नवग्रह शांति पूजा के लिए सबसे उपयुक्त समय जातक की जन्म कुंडली में ग्रहों की महादशा या अंतर्दशा के दौरान होता है। सामान्यतः, अमावस्या, पूर्णिमा या किसी भी शुभ नक्षत्र के दिन इसे करना अत्यंत फलदायी माना जाता है। लाल किताब के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति लंबे समय से मानसिक या आर्थिक समस्याओं से जूझ रहा है, तो उसे बिना किसी देरी के अपनी कुंडली का विश्लेषण करवाकर पूजा करनी चाहिए। इसके अलावा, मंगलवार या शनिवार को ग्रहों की शांति के लिए विशेष अनुष्ठान करना शुभ होता है।
❓ क्या घर पर नवग्रह शांति पूजा करना संभव है?
जी हाँ, नवग्रह शांति पूजा को घर पर भी पूरी श्रद्धा और विधि-विधान के साथ किया जा सकता है। इसके लिए आपको एक शुद्ध स्थान पर नवग्रह यंत्र स्थापित करना होगा और वैदिक मंत्रों का उच्चारण करना होगा। यदि आप स्वयं पूजा करने में असमर्थ हैं, तो किसी विद्वान ब्राह्मण की सहायता लेना उत्तम है। आज के समय में तकनीक का लाभ उठाते हुए, आप 'Pháp Âm Gia Đạo™' जैसे डिजिटल टूल का उपयोग करके अपने लिए व्यक्तिगत मंत्रों का उच्चारण करवा सकते हैं, जो आपकी पूजा में सहायक सिद्ध होते हैं।
❓ नवग्रह पूजा के बाद किन बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए?
पूजा के संपन्न होने के बाद, दान-पुण्य का विशेष महत्व होता है। नवग्रहों से संबंधित वस्तुओं जैसे कि गेहूं, चावल, मूंग दाल या तिल का दान करना चाहिए। साथ ही, पूजा के बाद अपने आचरण में सात्विकता बनाए रखना अनिवार्य है। नियमित रूप से अपने इष्ट देव का ध्यान करें और किसी भी प्रकार के नकारात्मक कार्यों से दूर रहें। लाल किताब विशेषज्ञ के अनुसार, निरंतर सत्कर्म करना ही पूजा के वास्तविक लाभ को बनाए रखने का एकमात्र अचूक मार्ग है।
⚠️ अस्वीकरण: यह लेख शैक्षिक और मनोरंजन उद्देश्यों के लिए सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपराओं की खोज करता है। सामग्री लोक ज्ञान, शास्त्रीय ग्रंथों और सांस्कृतिक विरासत पर आधारित है। यह चिकित्सा, कानूनी या वित्तीय मामलों में पेशेवर सलाह का विकल्प नहीं है।

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